By using this site, you agree to the Privacy Policy
Accept
October 21, 2026
The Fourth
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Reading: 8 अप्रैल: क्रांति और बलिदान का दिन
Font ResizerAa
The FourthThe Fourth
Search
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Follow US
WhatsApp Image 2025 04 08 at 5.08.53 PM - The Fourth
Fourth Special

8 अप्रैल: क्रांति और बलिदान का दिन

पांडे 1849 में बंगाल आर्मी में शामिल हुए थे

Last updated: अप्रैल 8, 2025 5:11 अपराह्न
By Mihir Dhekane 2 वर्ष पहले
Share
3 Min Read
SHARE

8 अप्रैल, ये भारत के इतिहास को मोड़ देने वाली तारीख हैं। यही वो दिन हैं जब 1857 की क्रांति की पहली चिंगारी और क्रांतिकारी मंगल पांडे को अंग्रेज़ों ने फांसी पर लटका दिया था। आज उनकी पुण्यतिथि पर एक नज़र पूरे जीवन और 1857 के संग्राम में उनकी भूमिका पर।

मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को वर्तमान उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। पांडे 1849 में बंगाल आर्मी में शामिल हुए थे। मार्च 1857 में, वह 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री की 5वीं कंपनी में एक सिपाही थे।

1857 के उस संग्राम का कारण एक राइफल बनी। अंग्रेज़ों ने उस समय भारतीय सैनिकों को एनफील्ड राइफल दी थी, जिसकी कारतूसों को दांत से काटना पड़ता था। कारतूस के बाहरी कवर में चर्बी होती थी। सिपाहियों में ये अफवाह फैल चुकी थी कि कारतूस में लगी चर्बी सूअर और गाय की चर्बी भरी हुई थी। यह बात हिंदू और मुस्लिम सैनिकों की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ थी।

29 मार्च 1857 को आखिरकार क्रांति का पहला बिगुल बज ही गया जब पांडे ने अंग्रेज़ अफसर Hewson और Baugh को मौत के घाट उतार दिया। पांडे ने सभी को चर्बी की बात बताते हुए अंग्रेज़ों से बदला लेने की बात कही। इतने में एक और अंग्रेज़ अफसर Wheeler वहां पहुंचा और मंगल पांडे को गिरफ्तार करने की बात कही मगर किसी ने उसकी बात नहीं सुनी।

हालांकि उनकी वीरगति ने आज़ादी की आग को और बुलंद कर दिया। 10 मई 1857 से 1 नवंबर 1858 तक चले आज़ादी के संग्राम में कुंवर सिंह, रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और नाना साहेब जैसे अनेक भारतीय योद्धाओं ने अपने पराक्रम का प्रदर्शन किया। हालांकि जल्द ही इसे दबा दिया गया लेकिन अंग्रेज़ों के मन में डर ज़रूर बैठ गया था। इसके बाद भी किसी न किसी तरह आज़ादी के लिए संघर्ष लगातार जारी रहे। चाहे फिर वो हथियारों के साथ हो या शांतिपूर्ण तरीके से। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह, वीर सावरकर, बाघा जतिन, श्री अरविंद, बरिंद्र कुमार घोष जैसे अनगिनत नायकों ने अंग्रेज़ों की नाक में दम कर दिया था। वहीं शांतिपूर्ण तरीके से गांधीजी, सरदार पटेल और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे महान हस्तियों ने अंग्रेज़ों को झुकाया।

इतना ही नहीं, 8 अप्रैल 1929 को ही भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में बम फेंक कर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी थी। उनका उद्देश्य हिंसा नहीं बल्कि अंग्रेजों को जगाना था। “इंकलाब ज़िंदाबाद” की गूंज इसी दिन सदन में गूंज उठी। 8 अप्रैल की खासियत यहीं खत्म नहीं होती। इसी दिन 1894 में अपनी कविताओं से लोगों को जगाने वाले बंकिम चंद्र चटर्जी का निधन हुआ था। उनकी सबसे श्रेष्ठ रचना “वंदे मातरम” क्रान्तिकारियों की प्रेरणास्रोत बन गई थी।

You Might Also Like

Indore में नर्मदा की मेन लाइन फूटी तो 15 फीट उछला पानी

Hema Malini ने 77 की उम्र में निभाया माता पार्वती का किरदार

Navratri 2026 की शुरुआत आज से जानें खास बातें

Nana Patekar के निधन से सिनेमा में छाया गहरा सन्नाटा

Vidisha का भक्तिग्राम, आधुनिक सुविधाओं से दूर जीवन

TAGGED: 1857 uprising, April 8, Indian history, Mangal Pandey, Martyrdom, revolution, sacrifice, thefourth, thefourthindia
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp LinkedIn
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0

Follow US

Find US on Social Medias

Weekly Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading

Popular News

महू के अस्पताल हुए सम्मानित, इंदौर गवर्नमेंट लिस्ट मे भी नहीं

3 वर्ष पहले

Takeshi’s Castle reboot : JJ का रापचिक रीप्ले नही, अब टीटू मामा करेंगा धमाल

कैलिफोर्निया, जॉनसन बेबी पाउडर इस्तेमाल से हुआ कैंसर

क्या अब अपराधी चलाएंगे हमारा देश?

ज़ाम्बिया में फैला हैजा, 400 से ज्यादा लोगों की मौत

You Might Also Like

nehru-patel-jahan-thehre-the-us-200-saal-purani-residency-kothi-me-badlav-ki-yojana
Cities

नेहरू-पटेल जहां ठहरे थे, उस 200 साल पुरानी Residency Kothi में बदलाव की योजना

3 सप्ताह पहले
mppsc-aur-group-2-pariksha-ek-din-hone-se-badhi-mushkil
Education

MPPSC और ग्रुप-2 परीक्षा एक दिन होने से बढ़ी मुश्किल

3 सप्ताह पहले
IMG 20261002 WA0003 - The Fourth
Cities

Indore : भागीरथपुरा की रिपोर्ट पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

3 सप्ताह पहले
cm-mohan-yadav-ke-naye-jet-ki-kaman-videshi-pilot-sambhalenge
Cities

सीएम Mohan Yadav के नए जेट की कमान विदेशी पायलट संभालेंगे

4 सप्ताह पहले
The Fourth
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
  • Entertainment
  • Fashion
  • Health
  • Lifestyle
  • Science
  • Sports

Subscribe to our newsletter

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading
© The Fourth 2024. All Rights Reserved. By PixelDot Studios
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?