मध्य प्रदेश का Vidisha जिला ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के साथ अब एक अलग तरह की जीवनशैली के लिए भी चर्चा में है। गंजबासौदा क्षेत्र के बदवासा गांव, कल्हार स्टेशन रोड पर स्थित भक्तिग्राम में लोग आधुनिक जीवन की सुविधाओं से दूरी बनाकर प्रकृति और वैदिक परंपराओं से जुड़ा जीवन जीने की कोशिश कर रहे हैं। भक्तिग्राम की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इसका उद्देश्य वैदिक संस्कृति को गांव के जीवन में व्यवहारिक रूप से अपनाना, प्राकृतिक जीवन और आत्मनिर्भर व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
बिजली और मोबाइल से दूरी, दीये-लालटेन से रोशनी
Vidisha के गंजबासौदा क्षेत्र में स्थित इस समुदाय की जीवनशैली शहरों से काफी अलग है। सामने आई ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, यहां रहने वाले लोग बिजली और मोबाइल फोन जैसी आधुनिक सुविधाओं से दूरी बनाए हुए हैं। शाम ढलने के बाद रोशनी के लिए दीये और लालटेन का इस्तेमाल किया जाता है। रिपोर्ट में करीब 12 मिट्टी-खपरैल के घरों और लगभग 60 लोगों के यहां रहने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि उपलब्ध नहीं मिली है। इसलिए इन्हें ग्राउंड रिपोर्ट में बताए गए आंकड़ों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
Vidisha के भक्तिग्राम में क्यों चुना गया सादा जीवन
भक्तिग्राम की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक यह केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि वैदिक संस्कृति आधारित फार्म कम्युनिटी के रूप में विकसित किया गया है। यहां प्राकृतिक जीवन, गाय आधारित कृषि और आत्मनिर्भर व्यवस्था पर जोर दिया जाता है। संस्था के अनुसार इसका उद्देश्य प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाते हुए आध्यात्मिक जीवन को आगे बढ़ाना है। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यहां सुबह 4:30 बजे आरती और कीर्तन, इसके बाद गुरु पूजा और शाम को फिर आरती-कीर्तन का कार्यक्रम होता है। धार्मिक ग्रंथों पर आधारित अध्ययन भी इसकी दिनचर्या का हिस्सा है। भक्तिग्राम की शुरुआत 2021 में हुई थी।
डॉक्टर और इंजीनियरों ने भी छोड़ी शहर की भागदौड़
Vidisha के इस भक्तिग्राम को लेकर सामने आई रिपोर्ट की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां रहने वालों में पढ़े-लिखे और पेशेवर लोग भी शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टर और इंजीनियर जैसे पेशों से जुड़े लोगों ने भी शहर की व्यस्त जिंदगी से अलग यह जीवन चुना है। यहां रहने की सोच केवल सुविधाओं को छोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि भोजन, खेती, आध्यात्मिक गतिविधियों और दैनिक जीवन को अधिक प्राकृतिक तरीके से संचालित करने पर केंद्रित है। यही वजह है कि Vidisha का यह छोटा-सा समुदाय आधुनिक शहरी जीवन के बिल्कुल विपरीत उदाहरण के तौर पर सामने आता है।
Vidisha के गांव में बच्चों की जिंदगी भी अलग
रिपोर्ट में भक्तिग्राम के बच्चों की जीवनशैली का भी उल्लेख किया गया है। यहां बच्चों को पारंपरिक वातावरण में संस्कृत के श्लोक और धार्मिक शिक्षा से जोड़ने की बात सामने आई है। वहीं आधिकारिक जानकारी में 16 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण और शास्त्र आधारित शिक्षा का भी उल्लेख है। भक्तिग्राम की आधिकारिक वेबसाइट इसे गाय आधारित कृषि, प्राकृतिक जीवन और आत्मनिर्भर व्यवस्था की दिशा में विकसित किया जा रहा समुदाय बताती है। यहां का पता बदवासा गांव, कल्हार स्टेशन रोड, गंजबासौदा, Vidisha दिया गया है।
शहर से अलग जिंदगी का अनोखा प्रयोग
आज जब ज्यादातर लोगों की जिंदगी बिजली, इंटरनेट और मोबाइल पर निर्भर हो चुकी है, वहीं Vidisha का भक्तिग्राम आधुनिक सुविधाओं से दूरी बनाकर एक अलग जीवनशैली का प्रयोग कर रहा है। यहां रहने वाले लोगों का उद्देश्य सुविधाओं की दौड़ से बाहर निकलकर प्रकृति, खेती, आध्यात्मिकता और सादगी के करीब रहना बताया गया है।
