By using this site, you agree to the Privacy Policy
Accept
June 6, 2026
The Fourth
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Reading: Guru Nanak Jayanti: आखिर क्यों मनाते है गुरुनानक जयंती, और कैसे शुरू हुई लंगर की प्रथा
Font ResizerAa
The FourthThe Fourth
Search
  • World
  • India
  • Politics
  • Sports
  • Business
  • Tech
  • Fourth Special
  • Lifestyle
  • Health
  • More
    • Travel
    • Education
    • Science
    • Religion
    • Books
    • Entertainment
    • Food
    • Music
Follow US
1549288793 1024x700 1 - The Fourth
Religion

Guru Nanak Jayanti: आखिर क्यों मनाते है गुरुनानक जयंती, और कैसे शुरू हुई लंगर की प्रथा

क्या है गुरूनानक जी की तीन बड़ी शिक्षा।

Last updated: नवम्बर 27, 2023 7:58 अपराह्न
By Divya 3 वर्ष पहले
Share
6 Min Read
SHARE

गुरूनानक जयंती कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस साल 2023 में गुरूनानक जयंती आज यानि 27 नवंबर को मनाई जाएगी। कार्तिक पूर्णिमा के दिन सिखों के पहले गुरु गुरूनानक देव का जन्म हुआ था। इस लिए सिख धर्म में इस दिन को बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन को प्रकाश पर्व और गुरु पर्व के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही इस दिन गुरुद्वारों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दिन सिख लोग गुरुद्वारे जाकर गुरुग्रंथ साहिब का पाठ करते हैं।

कौन थे गुरुनानक, कब और कहा हुआ उनका जन्म

गुरुनानक देव सिख धर्म के पहले गुरु संस्थापक और एक आध्यात्मिक लीडर थे। उनका जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन यानि 15 अप्रैल 1469 में तलवंडी गांव में हुआ था। गुरु नानक देव एक दूरदर्शी और धार्मिक सुधारक थे। जिनकी शिक्षाओं और सिद्धांतों ने सिख धर्म की नींव रखी। आपको बता दे कि, गुरुनानक देव अपने आध्यात्मिक ज्ञान के लिए जाने जाते हैं। जिसके बारे में कहा जाता है कि, यह ज्ञान उन्हें बेन नदी के किनारे ध्यान की अवधि के दौरान मिला था। सिख परंपरा के अनुसार वह तीन दिनों के लिए पानी के भीतर गायब हो गए और एक दिव्य संदेश के साथ उभरे जिसमें ईश्वर की एकता और निस्वार्थ सेवा और समानता के लिए समर्पित जीवन जीने के महत्व पर जोर दिया गया।

सिख धर्म में लंगर का मतलब क्या है?

सिख धर्म में लंगर का मतलब यह हैं कि, बिना किसी भेदभाव जाति और ऊंच नीच की भावना से एक साथ एक ही रसोई में बना भोजन करना है। गुरुद्वारों में यह भोजन निःशुल्क होता है, और लंगर की व्यवस्था हर गुरुद्वारे में होती है। गुरुनानक देव जी ने कहा था कि “अमीर-गरीब जाती-पाती ऊंचा-नीचा इन सबसे ऊपर भूख है, जो लोग भूखे है उन्हे खाना खिलाओ” यही सबसे बड़ा कार्य होना चाहिए।

लंगर की प्रथा कब से शुरू हुई?

आपको बता दे कि सिख धर्म में प्रचलित कहानियों के अनुसार एक बार गुरुनानक जी के पिता ने उन्हें काम करने के लिए कुछ पैसे दिए थे। जिसे देकर उन्होंने कहा कि वो बाज़ार से सौदा करके कुछ पैसे कमा कर लेके आए। लेकिन रास्ते में उन्होंने कुछ भिखारियों और भूखों को देखा, तो उन्होंने सारे पैसों से भूखों को खाना खिला दिया और खाली हाथ घर लौट आए। इस वजह से गुरुनानक के पिता बहुत नाराज हुए। गुरुनानक देव का कहना है कि, सच्चा लाभ तो सेवा करने में ही है। तभी से गुरुनानक देव की यह परंपरा को गुरुद्वारे में शुरू किया। जिसके बाद से यह परंपरा अभी तक बनाई रखी है, जो अब भी चल रही है। साथ ही तब से पंजाब राज्य के अमृतसर के स्वर्ण मंदिर यानी गोल्डन टेम्पल में दुनिया का सबसे बड़ा लंगर आयोजित होता है।

गुरूनानक जी की तीन बड़ी शिक्षा

गुरु नानक जी की तीन बड़ी शिक्षा कि बात करे तो खुशहाली से जीने का मंत्र देती हैं। नाम जपो, किरत करो और वंड छको। यह सीखें कर्म से जुड़ी हुई हैं। जो हमें कर्म में श्रेष्ठता लाने की ओर ले जाती हैं।

नाम जपो

नाम जपो- गुरु नानक जी ने कहा है “सोचै सोचि न होवई, जो सोची लखवार। चुपै चुपि न होवई, जे लाई रहालिवतार”। यानी ईश्वर का रहस्य सिर्फ सोचने से नहीं जाना जा सकता है, इसलिए नाम जपे और नाम जपना यानी ईश्वर का नाम बार-बार सुनना और दोहराना।

किरत करो

किरत करो- यानी ईमानदारी से मेहनत कर आजीविका कमाना। श्रम की भावना सिख अवधारणा का भी केंद्र है। इसे स्थापित करने के लिए नानक जी ने एक अमीर जमींदार के शानदार भोजन की तुलना में गरीब के कठिन श्रम के माध्यम से अर्जित मोटे भोजन को प्राथमिकता दी थी।

वंड छको

वंड छको- एक बार गुरुनानक जी दो बेटों और लेहना के साथ थे। सामने एक शव ढंका हुआ था। नानक जी ने पूछा इसे कौन खाएगा। बेटे मौन थे। लेहना ने कहा मैं खाऊंगा। उन्हें गुरु पर विश्वास था। कपड़ा हटाने पर भोजन मिला। लेहना ने इसे गुरु को समर्पित कर ग्रहण किया। नानक जी ने कहा लेहना को पवित्र भोजन मिला, क्योंकि उसमें समर्पण का भाव और विश्वास की ताकत है।

अंतिम समय में यह थे गुरुनानक देव

आपको बता दे की लाहौर से 120 किलोमीटर दूर करतारपुर गुरुद्वारा है। जहाँ गुरुनानक देव ने 22 सितंबर 1539 को अंतिम सांस ली थी। यह गुरुद्वारा रावी नदी के पास है। जो भारत और पाकिस्तान सीमा से सिर्फ 3 किलोमीटर दूर है। इस गुरुद्वारा को गुरुद्वारा दरबार साहिब के नाम से भी जाना जाता है। यह सिखों के प्रमुख धर्मस्थलों में से एक है। आपको बता दे की इस स्थान पर गुरुनानक देव ने अपने जीवन के 16साल बिताए थे।

You Might Also Like

मध्यप्रदेश में मंदिरों के लिए ‘Temple-Bond’

57 दिनों तक चलेगी पवित्र Amarnath यात्रा

Shani Amavasya 2026: शनिदेव की कृपा पाने का पावन दिन

Buddha Purnima 2026: जानिए इस दिन का महत्व और खासियत

Shivaji महाराज पर बयान से भड़का विवाद, बागेश्वर बाबा के माफी मांगने के बाद भी थमा नहीं आक्रोश

TAGGED: Golden Temple, Guru Nanak Jayanti, Gurudwara, Kartik Purnima Langar, Sikhism
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp LinkedIn
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0

Follow US

Find US on Social Medias

Weekly Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading

Popular News

023amhm8 rahul gandhi 625x300 13 August 23 - The Fourth
Politics

एमपी मे राहुल गांधी ने दिखाया आक्रोश ,मालवा-निमाड़ में कांग्रेस का चुनावी शंखनाद !

3 वर्ष पहले

कोटा में NEET की तैयारी कर रही मध्य प्रदेश की काव्या का फिर हुआ अपहरण !

डी कॉक का लगातार दूसरा शतक, दिलाई संगाकारा की याद

अमेरिका की नेवादा यूनिवर्सिटी कैंपस में फायरिंग, तीन की मौत

बेतुके बयानों का विश्व विजेता है पाकिस्तान!

You Might Also Like

ddd39978 61f2 45b0 be87 1a7d43d2b6e2 1728033330944 - The Fourth
Religion

Baglamukhi Jayanti पर जागती है स्तंभन की अद्भुत ऊर्जा

1 महीना पहले
WhatsApp Image 2026 04 02 at 12.59.25 AM - The Fourth
Religion

Mahavir Jayanti 2026: अहिंसा और सत्य का अमर संदेश, देशभर में श्रद्धा उल्लास के साथ मनाया जाएगा पावन पर्व

2 महीना पहले
IMG 20260327 WA0011 - The Fourth
Religion

Ram Navami 2026: अयोध्या में सूर्य तिलक के साथ आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम

2 महीना पहले
IMG 20260327 WA0009 - The Fourth
Religion

Chaitra Navratri Day 9 मां सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व, परंपराएं और आध्यात्मिक रहस्य

2 महीना पहले
The Fourth
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
  • Entertainment
  • Fashion
  • Health
  • Lifestyle
  • Science
  • Sports

Subscribe to our newsletter

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
Loading
© The Fourth 2024. All Rights Reserved. By PixelDot Studios
  • About Us
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Careers
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?