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Reading: Shani Amavasya 2026: शनिदेव की कृपा पाने का पावन दिन
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Religion

Shani Amavasya 2026: शनिदेव की कृपा पाने का पावन दिन

न्याय के देवता की पूजा का विशेष संयोग

Last updated: मई 16, 2026 2:47 अपराह्न
By Divisha 2 महीना पहले
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10 Min Read
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हिंदू धर्म में Shani Amavasya को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जब शनिवार के दिन अमावस्या तिथि पड़ती है, तब इसे Shani Amavasya कहा जाता है। वर्ष 2026 में Shani Amavasya 16 मई को मनाई जाएगी और इसी दिन शनि जयंती का भी विशेष संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शनिदेव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में चल रही परेशानियां कम होती हैं और कर्मों के अनुसार शुभ फल प्राप्त होते हैं।

शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है। वे व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों का फल प्रदान करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को सबसे प्रभावशाली ग्रहों में गिना जाता है। माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति पर शनि की शुभ दृष्टि हो तो उसका जीवन सफलता, सम्मान और आर्थिक समृद्धि से भर जाता है। वहीं शनि की अशुभ स्थिति व्यक्ति को संघर्ष, मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियों का सामना करवा सकती है।

Shani Amavasya के दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और दान-पुण्य के माध्यम से शनिदेव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। इस दिन विशेष रूप से पीपल के पेड़ की पूजा, सरसों के तेल का दीपक जलाना और शनि मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

क्यों कहलाते हैं शनिदेव न्याय के देवता?

पौराणिक कथाओं के अनुसार शनिदेव भगवान सूर्य और माता छाया के पुत्र हैं। कहा जाता है कि माता छाया भगवान शिव की कठोर तपस्या कर रही थीं। इसी दौरान शनिदेव का जन्म हुआ। तपस्या के प्रभाव और सूर्य की तेज किरणों के कारण शनिदेव का वर्ण अत्यंत श्याम हो गया। जन्म के बाद जब सूर्यदेव ने शनिदेव को देखा तो उन्हें संदेह हुआ। मान्यता है कि शनिदेव की दृष्टि पड़ते ही सूर्यदेव का तेज कम हो गया। इसके बाद देवताओं और ऋषियों ने शनिदेव की शक्ति को पहचाना।

भगवान शिव ने शनिदेव को संसार में कर्मों के अनुसार न्याय देने की जिम्मेदारी सौंपी। इसी कारण शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है। माना जाता है कि शनिदेव किसी के साथ अन्याय नहीं करते। वे व्यक्ति के कर्मों के आधार पर ही फल देते हैं। अच्छे कर्म करने वालों को सफलता और सम्मान मिलता है जबकि गलत कार्य करने वालों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

Shani Amavasya और शनि जयंती का दुर्लभ संयोग

वर्ष 2026 में Shani Amavasya और शनि जयंती एक ही दिन पड़ रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संयोग अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली माना जाता है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का कई गुना अधिक फल प्राप्त हो सकता है।


धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शनिदेव की पूजा करने से साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दोष के प्रभाव कम हो सकते हैं। कई श्रद्धालु इस अवसर पर शनि मंदिरों में जाकर तेल चढ़ाते हैं और विशेष पूजा करवाते हैं। देशभर के प्रमुख शनि मंदिरों में इस दिन भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। विशेष रूप से मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित नवग्रह शनि मंदिर, महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर और उत्तर प्रदेश के कोकिलावन धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है।

Shani Amavasya पर पूजा का सही तरीका

Shani Amavasya के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान शनिदेव की प्रतिमा या चित्र के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए।

पूजा में काला तिल, उड़द की दाल, नीले फूल और तेल अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही शनि मंत्रों का जाप करना विशेष लाभकारी माना जाता है। श्रद्धालु “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करते हैं। पीपल के पेड़ की पूजा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि पीपल के पेड़ में शनिदेव का वास होता है। इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने और परिक्रमा करने से शनि दोष कम हो सकते हैं। कुछ लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। व्रत के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है और जरूरतमंदों को भोजन व वस्त्र दान किए जाते हैं।

शनि दोष और साढ़ेसाती का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह की चाल बेहद धीमी होती है। यही कारण है कि इन्हें शनैश्चर कहा जाता है। शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते हैं। जब शनि किसी व्यक्ति की चंद्र राशि के पहले, दूसरे और तीसरे भाव में आते हैं तो इसे साढ़ेसाती कहा जाता है।

साढ़ेसाती का समय लगभग साढ़े सात वर्षों तक चलता है। इस दौरान व्यक्ति को जीवन में संघर्ष, मानसिक तनाव और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि यदि व्यक्ति ईमानदार और मेहनती हो तो शनि उसे सफलता भी दिलाते हैं। ढैय्या को भी शनि का प्रभाव माना जाता है। यह लगभग ढाई वर्षों तक रहती है। Shani Amavasya के दिन पूजा और दान करने से इन प्रभावों को कम करने की मान्यता है।

Shani Amavasya पर दान का महत्व

धार्मिक ग्रंथों में Shani Amavasya पर दान को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, काले वस्त्र, उड़द दाल, काला तिल और लोहे की वस्तुएं दान करने की परंपरा है। माना जाता है कि दान करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। कई श्रद्धालु इस दिन गौ सेवा और जरूरतमंदों की सहायता भी करते हैं।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार दान हमेशा श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से करना चाहिए। दिखावे के लिए किया गया दान धार्मिक दृष्टि से उतना प्रभावी नहीं माना जाता।

Shani Amavasya से जुड़े प्रमुख मंदिर

भारत में शनिदेव के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां Shani Amavasya पर विशेष आयोजन किए जाते हैं।

शनि शिंगणापुर मंदिर

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महाराष्ट्र का शनि शिंगणापुर मंदिर विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां शनिदेव की स्वयंभू प्रतिमा स्थापित है। इस गांव की सबसे खास बात यह है कि यहां कई घरों में दरवाजे नहीं लगाए जाते। लोगों का विश्वास है कि शनिदेव स्वयं उनकी रक्षा करते हैं।

कोकिलावन धाम

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उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित कोकिलावन धाम भी शनिदेव का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां Shani Amavasya पर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

उज्जैन का नवग्रह मंदिर

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मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित नवग्रह मंदिर में शनिदेव की विशेष पूजा की जाती है। यहां श्रद्धालु शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष अनुष्ठान करवाते हैं।

Shani Amavasya पर क्या करें और क्या न करें

क्या करें :

  • शनिदेव की पूजा करें
  • सरसों के तेल का दीपक जलाएं
  • गरीबों को दान दें
  • पीपल के पेड़ की पूजा करें
  • शनि मंत्रों का जाप करें
  • जरूरतमंदों की सहायता करें

क्या न करें :

  • किसी का अपमान न करें
  • झूठ और धोखा देने से बचें
  • शराब और मांसाहार का सेवन न करें
  • बुजुर्गों और गरीबों का अनादर न करें
  • क्रोध और विवाद से दूर रहें

ज्योतिष में शनि ग्रह का महत्व

वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को कर्म, अनुशासन और न्याय का प्रतीक माना गया है। शनि व्यक्ति को मेहनत, धैर्य और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनि की शुभ स्थिति व्यक्ति को प्रशासनिक सफलता, राजनीति, व्यापार और सामाजिक सम्मान दिला सकती है। यदि कुंडली में शनि कमजोर स्थिति में हों तो व्यक्ति को करियर और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए लोग Shani Amavasya पर विशेष पूजा और उपाय करते हैं।

Shani Amavasya 2026 धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दिन शनि जयंती का विशेष संयोग बनने से इसका महत्व और बढ़ गया है। श्रद्धालु शनिदेव की पूजा, व्रत और दान के माध्यम से उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा और अच्छे कर्मों से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाओं को दूर करते हैं।

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