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Education

CBSE Result 2026: स्क्रीन पर जांची कॉपियां, 7 साल में सबसे कम रहा 12वीं का रिजल्ट

डिजिटल जांच ने बदला पूरा रिजल्ट पैटर्न

Last updated: मई 14, 2026 2:54 अपराह्न
By Divisha 3 सप्ताह पहले
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10 Min Read
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देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए इस साल का CBSE Result कई मायनों में अलग साबित हुआ। पहली बार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE ने बड़े स्तर पर डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू की, जिसे ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी OSM नाम दिया गया। इस नई व्यवस्था के तहत करीब 98.66 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की जांच स्क्रीन पर की गई। बोर्ड का दावा है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनी, लेकिन इसी बदलाव के बीच 12वीं का पास प्रतिशत घटकर 85.20 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो पिछले सात वर्षों में सबसे कम माना जा रहा है।

इस बार के CBSE Result ने छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन के कारण मार्क्स इन्फ्लेशन पर रोक लगी है और छात्रों को वास्तविक प्रदर्शन के आधार पर अंक मिले हैं। यही वजह है कि इस बार टॉप स्कोर और 95 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले छात्रों की संख्या में भी कमी देखने को मिली।

पहली बार इतने बड़े स्तर पर लागू हुआ OSM सिस्टम

CBSE ने 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में पहली बार देशभर में व्यापक स्तर पर ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया। इस प्रक्रिया के तहत छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया गया और फिर शिक्षकों ने उन्हें डिजिटल स्क्रीन पर जांचा। बोर्ड के अनुसार इस सिस्टम से कॉपियों की जांच अधिक तेज, सुरक्षित और निष्पक्ष हुई।

इस नए सिस्टम के कारण इस बार का CBSE Result पूरी तरह अलग दिखाई दिया। पहले जहां कॉपियों की मैन्युअल जांच में अलग-अलग परीक्षकों के बीच अंक देने में अंतर देखा जाता था, वहीं डिजिटल सिस्टम में निर्धारित मानकों के अनुसार जांच की गई। इससे छात्रों को अतिरिक्त या अनुमानित अंक मिलने की संभावना कम हुई। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार डिजिटल मूल्यांकन से हर उत्तर की मॉनिटरिंग संभव हुई। इसके अलावा मॉडरेशन और रीचेकिंग की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हुई। यही कारण है कि इस साल का CBSE Result अधिक सटीक माना जा रहा है।

7 साल में सबसे कम रहा पास प्रतिशत

इस बार 12वीं बोर्ड परीक्षा में लगभग 17.68 लाख छात्र शामिल हुए, जिनमें से करीब 15.07 लाख छात्र पास हुए। कुल पास प्रतिशत 85.20 रहा। पिछले साल यह आंकड़ा 88.39 प्रतिशत था। यानी एक साल में लगभग 3.19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर और साफ होती है।

पिछले वर्षों का पास प्रतिशत

2020 — 88.78%

2021 — 99.37%

2022 — 92.71%

2023 — 87.33%

2024 — 87.98%

2025 — 88.39%

2026 — 85.20%

इन आंकड़ों से साफ है कि इस बार का CBSE Result पिछले कई वर्षों की तुलना में अधिक सख्त मूल्यांकन के साथ सामने आया है। कोविड काल के बाद पहली बार इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

लड़कियों ने फिर मारी बाजी

हर साल की तरह इस बार भी लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों से बेहतर रहा। बोर्ड के अनुसार लड़कियों का पास प्रतिशत लड़कों की तुलना में लगभग 6.73 प्रतिशत अधिक रहा। इससे साफ है कि छात्राओं ने लगातार बेहतर प्रदर्शन की परंपरा कायम रखी है। इस साल के CBSE Result में कई राज्यों और क्षेत्रों में लड़कियों ने टॉप स्थान हासिल किए। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं में छात्राओं की निरंतरता और अनुशासन उनके बेहतर प्रदर्शन का प्रमुख कारण बन रहा है।

95 प्रतिशत से ऊपर अंक पाने वालों की संख्या घटी

इस बार के CBSE Result में सबसे बड़ा बदलाव हाई स्कोरिंग छात्रों की संख्या में देखने को मिला। 95 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले छात्रों का प्रतिशत घटकर 1 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गया। पिछले वर्षों में यह आंकड़ा काफी अधिक रहा था। डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू होने से मार्किंग में अतिरिक्त उदारता कम हुई। पहले जहां कई बार परीक्षकों द्वारा उत्तरों को लेकर अलग-अलग मानदंड अपनाए जाते थे, वहीं अब मूल्यांकन अधिक नियंत्रित और निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार हुआ। इसी वजह से 90 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले छात्रों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई। इस बदलाव ने यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में बोर्ड परीक्षाओं में वास्तविक प्रदर्शन को अधिक महत्व मिलेगा।

सप्लीमेंट्री श्रेणी में बढ़े छात्र

इस बार के CBSE Result में सप्लीमेंट्री श्रेणी में आने वाले छात्रों की संख्या भी बढ़ी है। लगभग 9 प्रतिशत से अधिक छात्र ऐसे रहे जिन्हें एक या अधिक विषयों में सप्लीमेंट्री मिली। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि सप्लीमेंट्री परीक्षा छात्रों के लिए दूसरा अवसर है और उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। CBSE जल्द ही सप्लीमेंट्री परीक्षा की तारीखें जारी करेगा। शिक्षकों का मानना है कि इस बार की सख्त मूल्यांकन प्रणाली के कारण कई छात्र मामूली अंतर से पास प्रतिशत हासिल नहीं कर सके। हालांकि विशेषज्ञ इसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं।

टॉपर कल्चर पर भी लगी रोक

इस बार के CBSE Result में बोर्ड ने टॉपर कल्चर को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। CBSE ने पहले की तरह कोई आधिकारिक टॉपर सूची जारी नहीं की। बोर्ड का उद्देश्य छात्रों के बीच अनावश्यक प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव को कम करना बताया गया। हालांकि सोशल मीडिया पर कई छात्रों के शानदार अंक चर्चा का विषय बने रहे, लेकिन बोर्ड ने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल प्रतिशत का खेल नहीं है। बोर्ड का ध्यान अब स्किल बेस्ड लर्निंग और कॉन्सेप्ट क्लियरिटी पर ज्यादा है।

दिल्ली और त्रिवेंद्रम रहे चर्चा में

क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो त्रिवेंद्रम रीजन एक बार फिर सबसे आगे रहा। यहां का पास प्रतिशत 95 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया। वहीं दिल्ली रीजन का प्रदर्शन भी बेहतर रहा।
इस साल के CBSE Result में प्रयागराज क्षेत्र का प्रदर्शन सबसे कमजोर माना गया, जहां पास प्रतिशत अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम रहा। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्रीय स्तर पर शिक्षण गुणवत्ता और संसाधनों का अंतर भी परिणामों को प्रभावित करता है।

सरकारी स्कूलों ने सुधारा प्रदर्शन

इस बार सरकारी स्कूलों के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला। केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों ने शानदार परिणाम दर्ज किए। कई सरकारी संस्थानों का पास प्रतिशत 98 प्रतिशत से अधिक रहा। वहीं निजी स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूलों में कुछ क्षेत्रों में बेहतर अनुशासन और परीक्षा तैयारी देखने को मिली। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल संसाधनों और बेहतर प्रशिक्षण का असर अब सरकारी स्कूलों में दिखाई देने लगा है।

इस बार का CBSE Result यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में बोर्ड परीक्षाएं केवल रटने की क्षमता पर आधारित नहीं रहेंगी। अब कॉन्सेप्ट, प्रस्तुतीकरण और वास्तविक समझ को अधिक महत्व दिया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों को अब शॉर्टकट तैयारी से बचना होगा। डिजिटल मूल्यांकन में हर उत्तर का विश्लेषण अधिक गहराई से किया जाता है। इसलिए अब परीक्षा में सफलता के लिए विषय की मजबूत समझ जरूरी होगी।

रीचेकिंग और वेरिफिकेशन प्रक्रिया भी बदली

CBSE ने इस बार रीचेकिंग और वेरिफिकेशन प्रक्रिया को भी डिजिटल बनाया है। छात्र ऑनलाइन माध्यम से अपनी कॉपी की जांच के लिए आवेदन कर सकेंगे। बोर्ड के अनुसार इससे पारदर्शिता और बढ़ेगी। इस बदलाव के कारण CBSE Result को लेकर छात्रों के बीच भरोसा बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। बोर्ड का कहना है कि भविष्य में पूरी मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक टेक्नोलॉजी आधारित बनाया जाएगा।

शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत

इस साल का CBSE Result केवल एक परीक्षा परिणाम नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित मॉनिटरिंग, डिजिटल मूल्यांकन और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का उपयोग आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है। इससे छात्रों को निष्पक्ष मूल्यांकन मिलेगा, लेकिन साथ ही प्रतियोगिता भी अधिक कठिन हो सकती है। ऐसे में छात्रों को केवल अंक नहीं बल्कि वास्तविक ज्ञान और कौशल पर ध्यान देना होगा।

2026 का CBSE Result कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। पहली बार इतने बड़े स्तर पर डिजिटल मूल्यांकन लागू हुआ और इसका सीधा असर परिणामों में दिखाई दिया। पास प्रतिशत में गिरावट, हाई स्कोरर्स की संख्या में कमी और सख्त मूल्यांकन ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब बोर्ड परीक्षाओं का दौर बदल चुका है।

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