इंदौर। इंदौर नगर निगम के विभिन्न मार्केट में स्थित 2900 दुकान का किराया घटाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए निगम के राजस्व विभाग के द्वारा प्रस्ताव तैयार कर लेखा विभाग को भेज दिया गया है। अब लेखा विभाग में इस प्रस्ताव का परीक्षण किया जा रहा है।
नगर निगम के मार्केट की दुकानों के किराए का मामला पिछले 3 साल से उलझा हुआ था। पूर्व में नगर निगम के अधिकारियों के द्वारा दुकानों के किराए में मनमाने तरीके से वृद्धि कर दी गई। इसका व्यापारियों के द्वारा विरोध किया जा रहा था। व्यापारियों का कहना था की दुकान देते समय नगर निगम के द्वारा हमारे साथ जो एग्रीमेंट किया गया था उसमें दुकान की किराया वृद्धि का फार्मूला तया था। निगम को इस फार्मूले के हिसाब से ही किराया बढ़ाने का काम करना चाहिए। निगम के द्वारा इस फार्मूले को दरकिनार करते हुए मनमाने तरीके से किराया बढ़ाने का काम किया गया। इसके विरोध में अलग-अलग मार्केट के व्यापारियों के द्वारा निगम अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी दिया गया था।
व्यापारियों के विरोध को देखते हुए नगर निगम परिषद की बैठक में एक प्रस्ताव मंजूर किया गया था। इसके तहत निगम प्रशासन को यह निर्देश दिया गया था कि व्यापारियों के साथ किए गए एग्रीमेंट के अनुसार ही किराया वृद्धि की जाए बाकी की किराया वृद्धि को वापस लिया जाएं। निगम परिषद की बैठक में यह प्रस्ताव होने के बाद भी पिछले कुछ सालों से निगम के अधिकारी इस प्रस्ताव को रोक कर बैठे हुए थे। उसका क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा था।
पिछले दिनों इस मामले को लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव के द्वारा कार्रवाई के लिए निर्देश दिए गए थे। इस निर्देश के परिपेक्ष में निगम के अपर आयुक्त राजस्व आकाश सिंह के द्वारा पूरे मामले का परीक्षण शुरू किया गया था। इस परीक्षण के उपरांत अब निगम के विभिन्न मार्केट में स्थित 2900 दुकानों का किराया एग्रीमेंट के अनुसार निश्चित करते हुए नया प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव में इन दुकानों पर निगम के अधिकारियों के द्वारा मनमाने तरीके से लगाया गया किराया कम कर दिया गया है। अब यह प्रस्ताव अंतिम परीक्षण के लिए लेखा विभाग में भेजा गया है। वहां परीक्षण होने के बाद इन दुकानों पर नई किराया व्यवस्था को लागू किया जाएगा।
ज्यादा जमा किया गया पैसा एडजेस्ट होगा
निगम के द्वारा जब किराया मनमाने तरीके से बढ़ा दिया गया था तो विरोध करने के बावजूद व्यापारियों के द्वारा बड़ी हुई दर से किराया जमा भी करवाया गया है। ऐसे में नगर निगम के द्वारा यह तय किया गया है की दुकान का जितना किराया होता है उसे जितनी ज्यादा राशि जमा कराई गई है उस राशि को आने वाले समय के किराए में एडजस्ट किया जाएगा। इसके लिए भी हर दुकान का अलग-अलग खाता तैयार किया जा रहा है। जिसमें यह स्पष्ट होगा कि नियम से किस दुकान का कितना किराया बन रहा था और उसके द्वारा कितनी राशि ज्यादा जमा करवाई गई है।
