इंदौर। कांग्रेस ने पानी के नमूने लेकर हाल ही में उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक की तो निगम बैक फुट पर आ गया। इसके परिणाम स्वरुप अब निगम को पानी की जांच करने वाली अपनी प्रयोगशाला की याद आई है। निगम के द्वारा अब हर महीने 2000 नमूने लेकर उनकी जांच करने की तैयारी की जा रही है।
पिछले वर्ष के अंत में जब भागीरथपुरा में जहरीला पानी सप्लाई हो गया और उसके कारण 36 लोगों की मौत हो गई तो उसके बाद में पूरे शहर में आने वाला गंदा पानी सबसे बड़ा मुद्दा बन गया। इस मामले के बढ़ने पर कांग्रेस ने शहर में कई स्थानों से पानी के नमूने एकत्रित किया और जांच के लिए भेजने का दावा किया। पिछले दिनों प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी के द्वारा पानी के 240 नमूने की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। उनके द्वारा दावा किया गया कि इसमें से 90% नमूने खराब पानी के पाए गए हैं। इस पानी में जहरीले तत्व मौजूद है। पटवारी के इस दावे से इंदौर में राजनीति गर्म हो गई।
इसके बाद अब नगर निगम इस मामले को लेकर जाग गया है। निगम को इस बात का एहसास हो गया है कि पानी के नमूने का नियमित कार्य आवश्यक है। वैसे भी यह हकीकत है कि यदि नगर निगम के द्वारा पानी के नमूने लेने का काम किया जा रहा होता तो शायद भागीरथ पुरा जैसी घटना नहीं हो पाती। इस घटना से कांग्रेस को जो राजनीतिक लाभ प्राप्त हुआ है उसे देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव के द्वारा एक नई योजना तैयार करवाई गई है। इस योजना में उनके द्वारा यह कोशिश की जा रही है कि नगर निगम की प्रयोगशाला का आधुनिकीकरण कर दिया जाएं। इस प्रयोगशाला के माध्यम से हर महीने कम से कम 2000 पानी के नमूने की जांच का कार्य किया जाएं। ताकि कभी भी जनता के बीच में यह संदेश विरोधी दल नहीं दे सके की नगर निगम जो पानी पिला रहा है वह अशुद्ध है या जहरीला है।
