इंदौर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी के द्वारा आज 280 पानी के सैंपल की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया। इनमें से 98 प्रतिशत रिपोर्ट में पानी न केवल संक्रमित है बल्कि इतना ज्यादा खतरनाक है कि वह लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर सकता है। कांग्रेस के द्वारा यह रिपोर्ट अब सभी विधायक महापौर और नगर निगम आयुक्त को आगे की कार्रवाई के लिए सौपी जाएगी।
पटवारी ने बताया कि कांग्रेस के द्वारा सारे शहर में 2000 पानी के नमूने लिए गए थे। इसमें से 280 नमूने दिल्ली की प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए थे। उक्त नमूने लेने के लिए प्रयोगशाला की टीम ही इंदौर में गली-गली में घूमी थी। इसमें उच्च आय वर्ग, मध्यम आय वर्ग और निम्न आय वर्ग के निवास वाले क्षेत्र से पानी के नमूने लिए गए थे। यह नमूने इंदौर शहर के 30 वार्ड से लिए गए थे जिसमें की सुदामा नगर में महापौर के निवास के ठीक सामने के मकान से भी नमूने लिए गए थे। इसमें से 98 प्रतिशत नमूने में पानी पीने योग्य नहीं होकर खतरनाक स्थिति में है। आज कांग्रेस के द्वारा इन सभी पानी के नमूने की रिपोर्ट को सार्वजनिक रूप से जारी किया गया। अब कांग्रेस का एक दल सभी विधायकों, महापौर और निगम आयुक्त के पास जाकर पानी के नमूने की रिपोर्ट को सौपेगा और उनसे इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने तथा नागरिकों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए आवाज उठाएगा। कांग्रेस के द्वारा सकारात्मक राजनीति की दिशा में यह काम किया जा रहा है।
इंदौर में मुआवजा क्यों नहीं?
पटवारी ने बताया कि राज्य सरकार के द्वारा उज्जैन में जो भी तोड़फोड़ की जा रही है अथवा सड़क के लिए जमीन ली जा रही है तो उसमें भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधान के अनुसार मुआवजा दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि इंदौर में यह मुआवजा क्यों नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि जब एक देश एक टैक्स और एक देश एक कानून की बात कही जा रही है तो इंदौर और उज्जैन में ही असमानता की स्थिति क्यों है। इंदौर में भी जिन लोगों के मकान टूट रहे हैं और तोड़े जाना है उन्हें भी मुआवजा दिया जाना चाहिए।
मेट्रोपॉलिटन सिटी के नाम पर आपत्ति
पटवारी ने कहा कि राज्य सरकार के द्वारा इंदौर को महानगर का दर्जा देते हुए मेट्रोपॉलिटन सिटी का गठन किया जा रहा है। इसका नाम सरकार के द्वारा उज्जैन इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी रखा गया है। यह आपत्तिजनक है। इंदौर एक बड़ा हब है ऐसे में इंदौर का नाम पहले रखा जाना चाहिए। इस मामले में किसी भी जनप्रतिनिधि के द्वारा कुछ भी नहीं कहा जाना भी सबसे ज्यादा आपत्तिजनक है।
